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INDIA RADIO
आकाशवाणी पचहत्तर वर्षों से भारतीय जीवन का एक अहम हिस्सा रहा है । सन् 1927 में रेडियो क्लबों के रूप में हुई एक छोटी सी शुरूआत से आज आकाशवाणी अपने शार्ट वेव / मीडियम वेव / एफ एम ट्रांसमीटरों के सबसे बड़े संजाल के माध्यम से देश के दूरदराज इलाकों के कोने-कोने तक अपनी सेवाएँ पहुँचाने में सबसे अग्रणी है । राष्ट्र के दुर्गम और सुदूर अंचलों में बेहद सादा जीवन जीने वाले लोग भी मामूली बैटरी से चलने वाले एक छोटे से ट्रांजिस्टर के जरिए आकाशवाणी के कार्यक्रम आसानी से सुन सकते हैं । आकाशवाणी का उद्देश्य है `` बहुजन हिताय – बहुजन सुखाय `` अर्थात् शिक्षा, सूचना और मनोरंजन के माध्यम से सबके हित और सबके सुख के लिए, जन साधारण के साथ खुशियाँ और जानकारियाँ बाँटना । इसी उद्देश्य के लिए आकाशवाणी की सेवाएँ प्राथमिक चैनल, राष्ट्रीय चैनल, विज्ञापन प्रसारण सेवा (विविध भारती), एफएम चैनल और विदेश प्रसारण सेवा के माध्यम से, जन-जन तक पहुंचती है । आज आकाशवाणी अपने 213 प्रसारण केन्द्रों के ताने-बाने से देश के 90 प्रतिशत भूभाग और करीब एक अरब की लगभग पूरी आबादी की सेवा में रत है ।
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DOORDARSHAN
भारत में दूरदर्शन का ताना-बाना पाँच क्षेत्रों में बांटा गया है । ये हैं उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और उत्तर पूर्व क्षेत्र । पश्चिम क्षेत्र का दायित्व है महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा । इन पाँच राज्यों में स्थित ट्रांसमीटरों, स्टूडियो एवं लघु शक्ति ट्रांसमीटरों की स्थापना, अनुरक्षण और उनका सु-संचालन । इस क्षेत्र में टेरेस्ट्रियल रूप में दूरदर्शन के विभिन्न कार्यक्रम 11 दूरदर्शन केन्द्रों, 15 उच्च शक्ति ट्रांसमीटरों और दूरदर्शन अनुरक्षण केन्द्रों के नियंत्रणाधीन बहुत से लघु शक्ति ट्रांसमीटरों के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाये जाते हैं । इस क्षेत्र में स्थित दूरदर्शन के प्रमुख केन्द्र डिजीटल स्टूडियो, ओबी बैन और अपलिंकिंग की सुविधाओं से संपन्न हैं ताकि कई सीधे कार्यक्रम सेटलाईट के माध्यम से जन साधारण तक पहुंचाए जा सकें ।
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